
Kin Lafzon Me Likhu Main Apne Intezar Ko
Bezubaan Sa Ishq Khamoshi Se Dhundhta Hai Tumhe
किन लफ़्ज़ों में लिखू मैं अपने इंतज़ार को
बेज़ुबान सा इश्क़ ख़ामोशी से ढूंढता है तुम्हे
Kin Lafzon Me Likhu Main Apne Intezar Ko
Bezubaan Sa Ishq Khamoshi Se Dhundhta Hai Tumhe
किन लफ़्ज़ों में लिखू मैं अपने इंतज़ार को
बेज़ुबान सा इश्क़ ख़ामोशी से ढूंढता है तुम्हे